श्राद्ध 20 सितंबर 2021 – 6 अक्तूबर 2021

श्राद्ध

पितृ पक्ष का महत्व

 श्रद्धा से श्राद्ध शब्द बना है। श्रद्धा पुर्वक किये हुए कार्य को श्राद्ध कहते है। सत्कार्यो के लिये, सत्पुरुषो के लिये सद्भावो के लिये अंदर की,कृतज्ञता की भावना रखना श्राद्ध कहलाता है। उपकारी तत्वो के प्रति आदर प्रकट करना, जिन्होने अपने को किसी प्रकार का लाभ पहुँचाया है, उनके लिये कृतज्ञता होना श्रद्धालुओ का आवश्यक कर्तव्य है। ऐसे श्रद्धा हिंदुओ का मेरुदंड है । इस श्रद्धा को हटा दिया जाये तो हिन्दू धर्म की सारी महत्ता नष्ट हो जायेगी और वह एक नि:सत्तव चुछं मात्र रह जायेगा। श्रद्धा हिन्दु धर्म का एक अंग है,इसलिए श्राद्ध उसका धार्मिक कृत्य है। माता-पिता और गुरु के प्रयत्न से बालक का विकास होता है। इन तीनो का उपकार मनुष्य के ऊपर बहुत अधिक होता है। उस उपकार के बदले में बालक को इन तीनो के प्रति अटूट श्रद्धा मन में धारण किये रहने का शास्त्रकारो ने आदेश किया है। "मातृ देवो भव , पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव" इन श्रुतियो में इन्हे देव-नर  तनधारी देव मानने और श्रद्धा रखने का विधान किया है। स्मृतिकारो ने माता को ब्रम्हा,पिता को विष्णू और आचार्य को शिव का स्थान दिया है। यह कृतज्ञता की भावना सदैव बनी रहे,इसलिए गुरूजनो का चरणस्पर्श अभिवंदन करना नित्य धर्मकृत्यो में सम्मिलित किया गया है। यह कृतज्ञता की भावना जीवन भर धारण किये रहना आवशयक है। यदि इन गुरुजनों का स्वर्गवास हो जाये तो भी मनुष्य को वह श्रद्धा कायम रखनी चाहिए।इस दृष्टी से मृत्यु के पश्चात पितृपक्षो में मृत्यु की वर्ष तिथि के दिन पर्व, समारोहों पर श्राद्ध करने का श्रुति-स्मतियों में विधान पाया जाता है। नित्य की संध्या के साथ तर्पण जुड़ा हुआ है। जल की एक अंजली भरकर हम स्वर्गीय पितृदेवों के चरणों में उसे अर्पित कर देते हैं। उनके नित्य चरणस्पर्श, अभिवंदन की क्रिया दूसरे रूप में इस प्रकार पूरी होती है। जीवित और मृत पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का यह धर्मकृत्य किसी न किसी रूप में मनुष्य पूरा करता है और एक आत्मसंतोष का अनुभव करता है।

पितृ पक्ष तिथि

पितृ पक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। इस दिन सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है।

श्राद्ध की तिथियां

  • पूर्णिमा श्राद्ध – 20 सितंबर 2021
  • प्रतिपदा श्राद्ध – 21 सितंबर 2021
  • द्वितीया श्राद्ध – 22 सितंबर 2021
  • तृतीया श्राद्ध – 23 सितंबर 2021
  • चतुर्थी श्राद्ध – 24 सितंबर 2021,
  • पंचमी श्राद्ध – 25 सितंबर 2021
  • षष्ठी श्राद्ध – 27 सितंबर 2021
  • सप्तमी श्राद्ध – 28 सितंबर 2021
  • अष्टमी श्राद्ध- 29 सितंबर 2021
  • नवमी श्राद्ध – 30 सितंबर 2021 
  • दशमी श्राद्ध – 1 अक्तूबर 2021
  • एकादशी श्राद्ध – 2 अक्तूबर 2021
  • द्वादशी श्राद्ध- 3 अक्तूबर 2021
  • त्रयोदशी श्राद्ध – 4 अक्तूबर 2021
  • चतुर्दशी श्राद्ध- 5 अक्तूबर 2021
  • अमावस्या श्राद्ध- 6 अक्तूबर 2021

श्राद्ध विधि

  •  ब्राह्मण के जरिए ही श्राद्ध कर्म (पिंड दान, तर्पण) करवाना चाहिए।
  • श्राद्ध कर्म में पूरी श्रद्धा से ब्राह्मणों को तो दान दिया ही जाता है ।
  • इसके साथ-साथ गाय, कुत्ते, कौवे आदि पशु-पक्षियों के लिए भी भोजन का एक अंश जरूर डालना चाहिए।इन्हें भोजन डालते समय अपने पितरों का स्मरण करना चाहिए. मन ही मन उनसे श्राद्ध ग्रहण करने का निवेदन करना चाहिए।
  • श्राद्ध पूजा दोपहर के समय शुरू करनी चाहिए।
  • ब्राह्मण की सहायता से मंत्रोच्चारण करें और पूजा के पश्चात जल से तर्पण करें।

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