🌷हरतालिका तीज पूजन सामग्री🌷

हरतालि तीज कब आता है? 

हरतालि तीज का व्रत भाद्रपद (भादों) मास के शुक्लपक्ष की तृतीया को किया जाता है। 

तृतिया तिथी को किये जाने के कारण इस व्रत को “तीज का व्रत” कहा जाता है। 

हरतालि तीज महत्व – 

हरतालि तीज का व्रत स्त्रियों के लिये बहुत उपयोगी है। इससे अविवाहित कन्याओ को उत्तम वर और विवाहित स्त्रियों को अखण्ड सौभाग्य की

प्राप्ति होती है। जो भी स्त्री प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथी को “हरतालि का व्रत” करती है , उसे भगवान शंकर और माँ

पार्वती की कृपा से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

हरतालि का तीज क्यूँ मनाते है? 

पर्वत राज हिमालय और रानी मैंनावती के घर में एक सुन्दर कन्या ने जन्म लिया जिसका नाम पार्वती रखा गया। एक दिन हिमराज से मिलने

नारदमुनि आये जिनसे हिमराज ने पार्वती के भविष्य के बारे में जानना चाहा, जिस पर नारदमुनि ने बताया कि कन्या सुलक्षणा है और सभी

प्रकार के उत्तम गुणों से युक्त है किंतु कन्या का विवाह वैरागी-तपस्वी-योगी से होगा। यह सुनकर हिमराज ने चिंतत हो कर मुनिवर से  उपाय

जानना चाहा। तब नारद मुनि ने कहा की पार्वती के पति के जो जो गुण बताये है वे सभी भगवान शंकर में है, यदि पार्वती भगवान शंकर का

ध्यान कर तप-साधना करे तो भगवान शंकर  पार्वती से प्रसन्न होंगे तथा पार्वती को अपनी अर्धांगनी के रूप में स्वीकार करेंगे।

यह सुन पार्वती ने पर्वत पर जा कर वर्षो तक अलग अलग  तप-साधना की कुछ वर्ष फलाहार, कुछ वर्ष पत्तो तथा अंत के कुछ वर्ष तक वायु का

सेवन कर अत्यंत कठोर तप किया।फिर भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और हस्त नक्षत्र में भगवान शंकर ने माँ पार्वती को दर्शन

दिये और मनवांछित वरदान माँगने को कहा तो माँ पार्वती ने भगवान शंकर से विवाह कर उनके चरणो में स्थान देने की बात कही। 

तब भगवान शंकर ने तथास्तु कह कर माँ पर्वती  से शीघ्र ही माँ पार्वती से विवाह करने का वर दिया। साथ ही यह भी वर दिया कि  “हर”(शंकर

भगवान) ने माँ पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो कर उनके समक्ष प्रकट हो कर उन्हे वरदान दिया था की आज का दिन हरतालि का तीज भी कहा

जायेगा। जो स्त्री प्रत्येक वर्ष माँ पार्वती की पूजा-अर्चना कर कथा सुनेगी वो अखण्ड सौभाग्य प्राप्त करेगी।

पूजा-विधि-

सूर्योदय के साथ जाग कर स्नानदी कर स्वच्छ वस्त्र पहन कर अपने पूजा स्थान या आंगन को साफ कर अपने हाथो से मिट्टी अथवा बालूरेत की

मिट्टी से गौर गणेश और शिवलिंग की मुर्ति बनाकर लकडी के पाटे पर लाल रंग का कपड़ा बिछा कर मुर्ति को स्थापित करें।फिर दुध-दही-घी-

शक्कर-शहद को मिला कर पंचामृत बना ले। उसके बाद दिपक अगरबत्ती धूप दीप प्रज्जवलित कर लेवे। कंकु हल्दी मेहंदी सिन्दूर तथा श्रँगार

सामग्री से माँ गोरी और गणेशजी का पुजन करे ,ऊँ नम: शिवाय कह कर अष्टगन्ध- आंक बेलपत्र धतूरे चढ़ाकर भगवां शंकर की पूजा करे,फल

मिठाई पंचामृत का नेवैद्य लगाकर अंत में पान सुपारी लौंग इलायची समर्पित करे। पुन: माँ पार्वती और भगवान शंकर की प्रणाम कर हरतालि

का तीज की व्रत कथा सुने/पढ़े।

🌷हरतालिका तीज पूजन सामग्री🌷

  • पूजा की थाली, कुकू ,हल्दी, अबीर , गुलाल ,चन्दन , चावल ,केसर ,मेहँदी ,भस्म ,सिन्दूर ,भाँग ,इत्र ,घी ,कच्चा दूध ,दही ,पंचामृत ,शहद ,गुड़ ,,शक्कर ,नारियल ,पंचमेवा ,पंचखोका ,खारिक ,बादाम ,लौंग ,इलायची ,सिंघाड़ा ,मिठाई ,पान ,बेलपत्र ,तुलसी ,दूब ,केल का पत्ता ,ऋतु फल ,केले ,ककड़ी ,नींबू ,फूल ,फूलमाला ,शहद ,धतूरा ,शमी ,पत्तियां, आम के पत्ते , गणपति, बालमुकुंद ,गौर ,पैसा , सुपारी , छुट्टे पैसे , दक्षिणा ,नाड़ा, कलावा , कच्चा सूत , जनेऊ जोड़ा, ब्लाउज पीस , सुहाग सामग्री ,चूड़ शुद्धजल , पंचजल ,अगरबत्ती , धूप बत्ती , कपूर , रुई की बत्ती , माचिस , तांबे का लोटा(कलश) , ताम्रण , शुद्ध जलके लिए कलश , अभिषेक के लिए पात्र(तांबे के अलावा) , दीपक , अगरबत्ती का गट्ट , , आचमनी , चम्मच , घंटी , पाट , परा, आसन नैपकिन(छोटाटॉवल), रंगोली या आटा , गेंहूं , फुलेरा, बालू रेत .

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