Why Lord Ganesha is known as “EKDANTA” ?

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एक बार परशुराम ने भगवान आशुतोष और माँ पार्वती जी के दर्शन की इच्छा की और वे शीघ्र ही कैलाश-शिखर पहुचें, उस समय भगवान गणेश द्वार पर विराजमान थे। परशुराम ने गणेश जी से माँ पार्वती और भगवान शंकर से मिलने की इच्छा व्यक्त की।

गणेश जी ने कहा की अभी आप यही द्वार पर रुके लेकिन परशुराम जी नही माने गणेशजी ने अनेक युक्तियाँ प्रस्तुत की और परशुराम जी से द्वार पर ठहरने का आग्रह किया फिर भी वे नहीं माने और अंत में  बोले की “अब तुम बिना बाधा डाले द्वार के मध्य से हठ जाओ अन्यथा परिणाम ठीक नहीं होगा और अत्यंत क्रोधि हो कर उन्होने अपने परशु (फरसे) से वार कर दिया किंतु गणराज अपने पूज्य पिताजी का अमोघ अस्त्र का सम्मान करने की दृष्टी से उसे आपने बाँये दाँत पर ले लिया जिसके फलस्वरूप उस तेजस्वी परशु ने गणेश जी का दाँत मूल सहित काट दिया और वह परशुराम के हाथ में पुन: जा पहूँचा।

तभी से गणपती बप्पा के आठ नामो मे से एकदन्त बहुत प्रसिध्द है। वे आठ नाम ये हैं-

“गणेश मेकदन्तं च हेरम्बं विघ्ननाशकम् ।

ल्म्बोदरं शुर्पकर्णं  गजवक्त्रं गुहाग्रजम् ।।”

यह नाम सर्वत्र मंगल करने वाले और सभी संकटो को हरने वाले है।

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